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Archive for May, 2008

तुम क्या समझो गे मुझे,
तुम तो मुझे आईने की तरह देखा है|
माघ मास की सर्द सुबह में
तुम ने मुहे नर्म धुप की तरह देखा है|
रेतीली अँधेरी आंधियो में
तुमने मुझे आसरे की तरह देखा है|
जेठ मास की गर्म धुप में
तुम ने मुझे बदलो की तरह देखा है|
तुम्हे क्या मालूम हालात ये मेरे दिल की
तुम ने तो [...]

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उनको ये शिकायत है.. मैं बेवफ़ाई पे नही लिखता,
और मैं सोचता हूँ कि मैं उनकी रुसवाई पे नही लिखता.’
‘ख़ुद अपने से ज़्यादा बुरा, ज़माने में कौन है ??
मैं इसलिए औरों की.. बुराई पे नही लिखता.’
‘कुछ तो आदत से मज़बूर हैं और कुछ फ़ितरतों की पसंद है ,
ज़ख़्म कितने भी गहरे हों?? मैं उनकी दुहाई पे [...]

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