तुम क्या समझो गे मुझे,
तुम तो मुझे आईने की तरह देखा है|
माघ मास की सर्द सुबह में
तुम ने मुहे नर्म धुप की तरह देखा है|
रेतीली अँधेरी आंधियो में
तुमने मुझे आसरे की तरह देखा है|
जेठ मास की गर्म धुप में
तुम ने मुझे बदलो की तरह देखा है|
तुम्हे क्या मालूम हालात ये मेरे दिल की
तुम ने तो मुझे सिर्फ हँसते हुए देखा है||