जीवन पथ हो सुखद या दुखद जीना प्यार से
हर दिन एक सा नहीं होता यह बात जान ले
जीवन पथ पर डटकर हो तत्पर बढ़ना पथिक
मंजिल सदा उसे मिलती जो होता दृढ़ निश्चयी
लक्ष्य निर्धारित मन और मेहनतकश तन को
कोई रोक नहीं सकता सफलता सदा सुनिश्चित
समय बड़ा मूल्यवान उसे कैद करना मुश्किल
साथ दौड़ जाये जो प्रतिफल मिलना [...]
Archive for August, 2008
्््््््््् जीवन सूत्र ्््््््््््॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰विनोद बिस्सा
Posted in Great Poem colletion on August 1, 2008 | 1 Comment »
अगले जनम में —- लेखक अनिल
Posted in Great Poem colletion on August 1, 2008 | Leave a Comment »
अगले जनम में भी इतनी अच्छी रहे वो…
इतना सा बदल जाये मुझे अपना कहे वो
दुनिया का दर्द हो तो आँसू चाहे बहे वो
जब उस का दुख मिले आँखों में रहे वो
मैं सागर बन जायूं वो लहर नदी की..
साहिल साहिल शाम सहर साथ बहे वो
ये सिफ़त कायम रहे दिल उसका पढ़ सकूँ
कुछ भी ना सुनू मैं [...]
कोई रास्ता , कोई मंजिल तोह नहीं—लेखक रेखा
Posted in Great Poem colletion on August 1, 2008 | Leave a Comment »
कोई रास्ता , कोई मंजिल तोह नहीं,
कोई सागर ,कोई साहिल तोह नहीं,
राह में मिले हो चलते चलते,
ज़िन्दगी में मगर तुम शम्मिल तोह नहीं,
कर दूं दरवाज़े बंद अपने घर के तोह क्या,
दिल की धडकनों पे काबू हासिल तोह नहीं,
यह फैसला मेरा ही है तुझसे मोहाब्बत का ,
यूँ तोह तू मेरी हास्रतों के काबिल भी नहीं,
याद आता [...]
फिर मैं — लेखक रेखा
Posted in Great Poem colletion on August 1, 2008 | Leave a Comment »
सासों की सिसकियों को सुना है मैंने,
चली है मेरी रूह तेरे जिस्म में रहने,
रहने दे तनहा मुझे अंधेरे में,
की आती है तेरी पर्चियाँ वीरानो में मुझसे खेलने,
जिस्म को मेरे तू चैन की नींद सोने दे,
की ख्वाबों में अक्सर निकल जाते है हम दोनों सागर किनारे टहलने,
सदियों से लम्बी हो आज की रात यह मिलकर दुआ [...]
कोई – By Rekha
Posted in Great Poem colletion on August 1, 2008 | Leave a Comment »
जिस्म से जान को मांगता है कोई,
रूह चाहती है उसे कितना यह कहाँ जानता कोई,
पल दो पल का तोह नहीं रिश्ता हमारा तुम्हारा,
मुझको लगता था सदियों का है वास्ता कोई,
तेरी हसी में गूंजता था मेरे दरोदों गम का वीराना,
लगता है लिख रहा है खुदा फिर हंसी दास्ताँ कोई,
खली खान्दर है मेरे ख्वाबों का मकान,
दर पे [...]