बात करने से फिर बात बढ़ ही जायेगी,
यूँही खामोस नहीं, यूँही तो उदास नहीं|
कैसे कह सकती हूँ बो दिल के आस पास नहीं
किसी चिनार तले खवाब जो दफनाया था
कहूँ या ना की कोई खवाब मुझे रास नहीं|
कहने पे आये तो बातें कहाँ पहुचे जाने?
कितने अफ़साने बने कितने हम सुने ताने
बात इतनी सी बस इतनी ही रहने दीजे
ख्वाब ना रास मुझे खवाब अब रहने दीजे
बात करने से फिर बात बढ़ ही जायेगी,
मुख्तासिर बातें तेरी सोच कितनी देती है
जेहन की खिड़किया जो बंद थी खुल जाती है,
आती है ऐसी हवा जो मुझे रास नहीं,
ख्वाब पालते है वो हवाए जो मुझे रास नहीं|
तुझ से मैं दूर रहूँ ये बहुत बेहतर होगा
खवाब कोई न कभी जेहन में रोसन होगा,
एक अँधेरे में जिए जाना ही आसान कितना,
बंद करो खिड़की इस से याद कोई आती है,
बात करने से फिर बात बढ़ ही जायेगी,
नव वर्ष की शुभ कामनाएं।