मेरा ख्याल था ऐ दिन
तुम कुछ इस तरह मीलोगे
मैं रात के साये से डर के
तुम्हारा इन्तजार करूँगा
तेरे लिए सपनो का महल बनाऊंगा
फिर हर तरफ रोशनी होंगी
तेरे रोशनी में हर बाग़ खिल उठेंगे|
तुम मिले तो कुछ इस तरह
तुझ में इतनी गर्मी थी की
बार के बाग़ जल उठे
सारे सपनो का जनाजा निकला
तू खुद सबसे बरा धोका निकला
मैं [...]
Archive for March, 2009
सबसे बरा धोका by : Pravin Kumar Karn
Posted in My Own on March 27, 2009 | Leave a Comment »
बन के जादू तू
Posted in My Own on March 1, 2009 | 1 Comment »
मुझ से बिछर के तू
मेरे और करीब आगया है
मेरे नजरो से ओझल तू
मेरे दिल में समा गया है|
एक एक कतरा खुसी
तुने संजोये मेरे लिए
मेरे दुखो में अपने
आँख भिगोये मेरे लिए
आज नजर बन के तू
मेरे आँखों में समां गया है|
आज बन के तू आस्मा
मुझ पे प्यार बरसा रहा है
बदलो की गरज के साथ
तू मुझे बुला रहा [...]