मेरा ख्याल था ऐ दिन
तुम कुछ इस तरह मीलोगे
मैं रात के साये से डर के
तुम्हारा इन्तजार करूँगा
तेरे लिए सपनो का महल बनाऊंगा
फिर हर तरफ रोशनी होंगी
तेरे रोशनी में हर बाग़ खिल उठेंगे|
तुम मिले तो कुछ इस तरह
तुझ में इतनी गर्मी थी की
बार के बाग़ जल उठे
सारे सपनो का जनाजा निकला
तू खुद सबसे बरा धोका निकला
मैं तुझ से डरने लगा
रात का इन्तजार करने लगा
इस आस में के सायद
रात में इतनी गर्मी न होंगी
नहीं महल जलेंगे रात में
न मुर्झायेगी कोई कलि सायद
नहीं बाग़ जलेंगे रात में|