स्वपन-प्रिया
तुम बिन सच कितना
खाली सा
मेरे मन का जोगी दर्पण
तुम चाहो तो
तोड़ के बंधन
मेरे मन के गीत सजा दो
तुम चाहो तो
प्रीत निवेदन
मेरा इक पल में ठुकरा दो !
टूट न जाए
संयम मनका
कुछ मनके संयम के गुथना
जब तक मेरी
नींद न टूटे
मेरे सपन में बस तुम रुकना !
स्वपन प्रिया ये
दुनिया झूठी
हम-तुम को न सह पाएगी
अपने पावन
नातों को यह
जाने क्या-क्या [...]
Archive for the ‘Great Poem colletion’ Category
स्वपन प्रिया – गिरीश बिल्लोरे मुकुल
Posted in Great Poem colletion on October 12, 2009 | Leave a Comment »
रैन बसेरा लेखक : अज्ञात
Posted in Great Poem colletion on July 22, 2009 | Leave a Comment »
मुह की बात सुने हर कोई
मन की बात को जाने कौन|
हर तरफ है आवाजो की भीर
इसमें खामोसी पहचाने कौन|
जख्मो भरा है ये सफ़र
किस को मरहम लगाये कौन|
अबके बिछरे जाने अब कब मिले
किसे भूले और किसे याद आये कौन|
मुह में महोबत हाथ में खंजर
यहाँ अपना कौन पराया कौन|
सुबह हुवा उर गया पंछी
अब रात के साथी पहचाने [...]
जाने की दिन मैं यही बात कहता- लेखन: गुरुदेव रबिन्द्रनाथ ठाकुर
Posted in Great Poem colletion on February 13, 2009 | Leave a Comment »
जाने के दिन मैं यही बात कहता जाऊं की जो कुछ मैंने
देखा, पाया, उसकी उपमा नहीं थी||
इस प्रकाशमय सरोबर के कमल का मधुर मधु मैंने चखा है,
मैं उसे पीकर धन्य हुआ हूँ|
बिश्व के क्रीडागृह में मैंने अनेक खेल खेले है, दोनों नेत्रों से
मैंने अमित सौन्दर्य का पान किया है|
जिसका स्पर्स अस्म्भब है, उसने मेरे शरीर
में [...]
हकीकत का हंगामा- लेखक डा. कुमार बिश्वास
Posted in Great Poem colletion on January 31, 2009 | Leave a Comment »
कोई दीवाना कहता है, कई पागल समझता है|
मगर धरती के बैचैनी को बस बादल समझता है|
मैं तुझेसे दूर कैसा हूँ, तू मुझसे दूर कैसी है|
ये तेरा दिल समझाता है, ये मेरा दिल समझता है|
मोहबत एक अहसासों की पावन कहानी है;
कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है|
यहाँ सब कहते है मेरे आँखों में आंसू है,
जो [...]
बात बढ़ ही जायेगी लेखक:- तबसुम स्किल
Posted in Great Poem colletion on January 1, 2009 | 1 Comment »
बात करने से फिर बात बढ़ ही जायेगी,
यूँही खामोस नहीं, यूँही तो उदास नहीं|
कैसे कह सकती हूँ बो दिल के आस पास नहीं
किसी चिनार तले खवाब जो दफनाया था
कहूँ या ना की कोई खवाब मुझे रास नहीं|
कहने पे आये तो बातें कहाँ पहुचे जाने?
कितने अफ़साने बने कितने हम सुने ताने
बात इतनी सी [...]
दीवारों से लड़ता हूँ – By Aditya
Posted in Great Poem colletion on December 31, 2008 | 1 Comment »
दीवारों से लड़ता हूँ
ख़ुद से बातें करता हूँ
तुम जब से गए हो
जाने कितनी मौतें मरता हूँ
याद है तुम्हारी वो हंसी
जो छाओ थी मेरी धूप की
वो पलकें बिछाना तुम्हारा मेरे लिए
और मेरा उस प्यार को देख न पाना
लड़ता था तुमसे
गुस्सा होता था, चिढ भी जाता था अक्सर
लेकिन प्यार बहुत था
अब दीवारों से लड़ता हूँ
ख़ुद से बातें [...]
मैं बिपतियों से भयभीत न होऊं! :-लेखक: गुरुदेव श्री रबिन्द्रनाथ ठाकुर
Posted in Great Poem colletion on December 22, 2008 | 2 Comments »
“बिपतियों से रछा कर” – यह मेरी प्राथना नहीं,
मैं बिपतियों से भयभीत न होऊं!
अपने दुःख से ब्यथित चित को सांत्वना देने की भिछा
नहीं मांगता, मैं दुखो पे बिजय पाऊं !
यदि सहयता न जुटे तो भी मेरा बल न टूटे|
संसार से हनी ही मीले, केवल बांचना ही पाऊं
तो भी मेरा मन उसे छति [...]
लेखक: गुरुदेव श्री रबिन्द्रनाथ ठाकुर
Posted in Great Poem colletion on December 7, 2008 | Leave a Comment »
मैं अनेक बास्नाओ को प्राणपन से चाहता हूँ,
तुने मुझे उनसे बंचित रख, बचा लिया|
तेरी यह निष्ठुर दया मेरे जीवन के कण कण में ब्याप्त है|
तुने आकास, प्रकाश,देह, मन, प्राण, बिना मांगे दिए है|
प्रतिदिन तू मुझे इस महादान के योग्य बना रहा है|
अति इच्छा के संकट से उबार कर|
मैं कभी रह भुला सा, कभी तेरी रह [...]
आदमी को प्यार दो :- लेखन : अज्ञात
Posted in Great Poem colletion on October 15, 2008 | Leave a Comment »
सूनी-सूनी ज़िंदगी की राह है,
भटकी-भटकी हर नज़र-निगाह है,
राह को सँवार दो,
निगाह को निखार दो,
आदमी हो तुम कि उठो आदमी को प्यार दो,
रोते हुए आँसुओं की आरती उतार दो।
तुम हो एक फूल कल जो धूल बनके जाएगा,
आज है हवा में कल ज़मीन पर ही आएगा,
चलते व़क्त बाग़ बहुत रोएगा-रुलाएगा,
ख़ाक के सिवा मगर न कुछ भी हाथ [...]
्््््््््् जीवन सूत्र ्््््््््््॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰विनोद बिस्सा
Posted in Great Poem colletion on August 1, 2008 | 1 Comment »
जीवन पथ हो सुखद या दुखद जीना प्यार से
हर दिन एक सा नहीं होता यह बात जान ले
जीवन पथ पर डटकर हो तत्पर बढ़ना पथिक
मंजिल सदा उसे मिलती जो होता दृढ़ निश्चयी
लक्ष्य निर्धारित मन और मेहनतकश तन को
कोई रोक नहीं सकता सफलता सदा सुनिश्चित
समय बड़ा मूल्यवान उसे कैद करना मुश्किल
साथ दौड़ जाये जो प्रतिफल मिलना [...]